अपने mind को शांत कैसे करे ?

आज हम बात करने वाले है के अपने MIND को शांत कैसे करे, वैसे देखा जाये तो ये बहुत ही जरुरी टॉपिक है जिससे हर दूसरा इंसान जूझ रहा है आज की भागदौड़ भरी जिंदिगी में तनाव होना आम बात है पर अगर ये तनाव जरुरत से ज्यादा बढ़ जाए तो ये तनाव हमे बड़ी समस्या में डाल सकता है ये हमारी सेहत पर बुरा असर डालता है और तो और ये हमारी जिंदिगी में भी काफी बुरा प्रभाव डालता है, तो अब सवाल आता है के इसका सोलुशन क्या है आखिर इस प्रॉब्लम से बाहर कैसे निकले हम STRESS फ्री MIND से काम कर सके. अपना जीवन बेहतर कर बना सके। 

अगर आपका माइंड शांत नहीं है और आप इस प्रॉब्लम से छुटकारा पाना चाहते है तो आपको कुछ बातो को समझना होगा ,सबसे पहले आराम से बैठ जाइए अब कुछ देर तक अपने माइंड पर ध्यान दीजिये और देखिये के आपके दीमाक में क्या क्या चल रहा है आपको अपने दिमाग से लड़ना नही है और ना ही जबरदस्ती कुछ करना है बस आराम से बैठ कर ध्यान देना है के आखिर आप अपने अंदर क्या बोल रहे हो, ऐसा करने से आपका माइंड एक दम से रिलैक्स हो जायेगा इस बात से ये पता चलता है के जब आप ध्यान देने लगते हो तो आपका माइंड शांत होने लगता है और इससे आपका stress गायब हो जाता है  इसको आप रियल मैडिटेशन बोल सकते हो जिसको आप कही पर भी कर सकते है  बस आपको ध्यान देना है किसी भी काम में। 

चलिए अब जानते है के आखिर हमारा माइंड शांत क्यों नहीं रह पाता है ऐसा क्या होता है जिसकी वजह से हमारे दीमाक की शांति चली जाती है वैसे इसके दो कारण हो सकते है पहला के आप किसी ऐसी जगह पर रह रहे है या काम कर रहे है जहा काफी शोर है वहा पर आपकी शांति भांग हो सकती है पर अगर आप किसी शांत जगह पर भी शांति महसूस नहीं करते है तो ये मामला आपकी सोच का है जब आप शरीर की नेचुरल प्रोसेस के विपरीत सोचने लगते है तो तनाव,stress बनने लगता है , हम अपने जाने वाले कल में क्या गलत हुआ और आने वाले कल में क्या होगा के बारे में ही सोचते रहते है और अपने वर्त्तमान पल पर धियान नहीं दे पाते और बाद मे ये हमारी आदत बन जाती है अगर आपको सचाई पता हो तो हम जितना मर्जी सोचले हम अपने जाने वाले कल और आने वाले कल को कभी कंट्रोल नहीं कर सकते।

परमानेंट सोलुशन 

हमने ऊपर वाली लाइन में बात की थी शरीर की नेचुरल प्रोसेस के विपरीत सोचना अब इसका मतलब क्या है ? चलिए जानते है हम सिर्फ अपने एक्शन्स और अपनी थिंकिंग को ही कंट्रोल कर सकते है बाकि हम बॉडी की किसी भी चीज को कंट्रोल नहीं कर सकते, अब नेचुरल प्रोसेस मतलब किसी भी चीज का नेचुरल नेचर, बॉडी का अपना नेचर होता है जैसे भूक लगना, प्यास लगना, नींद आना, साँस लेना, धड़कन का चलना, ब्लड का बहना इत्यादि ये सब अपने आप होता है  हम इसे अपनी सोच से रोक नहीं सकते है पर अगर हम इसके विपरीत चलना शुरू कर दे तो क्या होगा अगर आपको काफी जोर से भूक लग रही है और आप अपने आपको खाना खाने से रोक रहे है तो क्या होगा ? ऐसा करने से आपकी बॉडी में stress पैदा हो जायेगा ऐसे ही जब हम अपने माइंड में कुछ भी बोलते रहते है तो दीमाक में stress तनाव या प्रेशर बनता है जिससे हमे तकलीफ होती है. क्योकि हम अपनी शरीर की नेचुरल biology प्रोसेस को ज्यादा समय तक रोक नहीं सकते जैसे हम अपनी सांस को ज्यादा समय तक कंट्रोल नहीं कर सकते ऐसे ही दिमाग का भी अपना नेचर है शांति से बैठकर काम करने का पर हम उसको अपने past और future की बातो में उलझा देते है जिसकी वजह से वो इधर उधर भागने लगता है जिससे वो कभी शांत बैठ ही नहीं पाता अगर हम दिमाक के नेचुरल प्रोसेस में रूकावट ना बने तो हमारा माइंड अपने आप ही शांत हो जायेगा।

आप एक काम और कर सकते है के जो कुछ भी आप सोच रहे हो जो भी बात आपको परेशांन कर रही है उसके ऊपर सवाल करो के जो कुछ भी आप सोच  रहे हो क्या वो सही है या नहीं ? और उससे आपको फयदा होगा या नुक्सान अगर आप इतना कर लेते है तो आपकी समस्या दूर हो सकती है। 

टेम्पररी सलूशन 

  • गाने सुनना 
  • मूवी देखना 
  • गेम खेलना 
  • बुक पढ़ना  
  • घूमना 
  • बच्चो के साथ खेलना 
  • वीडियो देकना 
  • 5 मिनट तक जल्दी जल्दी साँस लेना 


   

   

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