हमारे सेंसेस क्या होते है ? इंसान के SENSES की RANGE और क्षमता(Capacity) कितनी होती है ?

हेलो दोस्तों स्वागत हे आपका हमारे इस प्यारे से प्लेटफार्म पर, आज हम  बात करने वाले हे के एक इंसान के सेन्स की क्षमता कितनी होती है ? आज हम आपको इंसान के सारे सेंसेस के बारे में बात करेंगे। senses के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे, अगर नहीं जानते तो हम आपको बताएंगे की हमारे सेंसेस क्या होते है और कैसे काम करते है। 



ह्यूमन सेंसेस क्या होते है ?

इंसान यानि के हमारे सेंसेस क्या होते है. इस दुनिया में सारे ऐसे काम होते है  जिनको हम रोजाना एक्सप्रिएंस करते है। जैसे खाना पीना किसी भी चीज को छूना, सुंगना, देखना, सुनना इत्यादि हमारे शरीर से बाहर होने वाली सभी गतिविधियों को हम अपने सेंसेस के द्वारा ही महसूस करते है. अपने कानो से हम बाहर होने वाले गतिविधियों की आवाज को कानो से सुनन सकते है। आँखों से देख सकते है, हातो से छू सकते है मुँह से टेस्ट कर सकते है और नाक से सुंग सकते है। ये पांच जरुरी  सेंसेस होती है हमारी, ये कहना गलत नहीं होगा के इन सेंसेस के बिना इस दुनिया में हमारा रहना बेकार है। हमे इस नेचर का शुक्रिया करना चाहिए के हमे जीवन जीने के लिए इतनी अनमोल चीजे मिली है।

आगे हम बताएंगे के हमारे ये अनमोल सेंसेस की कितनी क्षमता होती है. पर फिलाल हम इनके बारे में थोड़ा और जान लेते है। तो बात कर लेते है सेंसेस के बारे में  वैसे तो सेंसेस दुनिया के हर एक जीव को मिले है इनके द्वारा ही एक जीव अपना जीवन जीता है, अपने आस पास के वातावरण को महसूस कर पाता हे। अपनी जिंदिगी में हम रोजाना कुछ ना कुछ बदलाव देखते है और महसूस करते है जिसके आधार पर हम ये तय कर सकते है के कोनसी चीज हमारे लिए सही है और कोनसी गलत। सेंसेस के द्वारा ही हम अपनी दुनिया को समझते है और सही गलत की पहचान करते है और आगे  बढ़ते है तरक्की करते है। 

 सेंसेस 

#1. आँख क्या होती है ?

आँख हमे, हमारे चारो और होने वाली गतितिविधियो को दिखाने में मदद करती है। अगर हम कहीं भी जाते है या कोई भी काम करते है तो उसको सही ढंग से करने के लिए और चीजों को ठीक से पहचानने में आँखे हमे हेल्प करती है हमरे बाहर जो कुछ भी होता है उसका चित्र हमारे आँख के रेटिना पर बनता है जिस वजह से हमे दिखाई देता है , चलिए हम आपको एक चौकाने वाली बात बताते है आप अपने जीवन में स्मार्ट फ़ोन जरूर इस्तेमाल करते होंगे, रोजाना उसके कैमरे से फोटो क्लिक करते होंगे आपको ये पता होगा के आपके फ़ोन का कैमरा कितने मेगापिक्सेल का है। लेकिन क्या आप जानते है के हमारी आँख कितने मेगापिक्सेल की है ?


 
इंसान की आँख कितनी दूर तक देख सकती है ? (eye range)

इंसान की आँख 576 मेगापिक्सेल की होती है। और ये एक इंसान को बहुत दूर तक दिखा सकती है। अगर आप किसी शहर में है तो आप 20 किलोमीटर दूर तक देख सकते है। अगर आप समुंद्र के किनारे खड़े है तो आप 30 किलोमीटर दूर देख सकते है। अगर कोई इंसान माउंट एवेरेस्ट पर है तो वो 339 किलोमीटर तक देख सकता है। ओर अब बात करते है आँख ज्यादा से ज्यादा कितनी दूर देख सकती है ? अगर एक इंसान स्पेस में देखे तो वो 24, 0000, 0000, 0000, 0000, 00 किलोमीटर दूर तक देख सकता है।

#2. नाक क्या होता है ?

नाक इंसान के शरीर को जिन्दा रखने में मदद करता है। ये हमारे मुँह पर आँखों के नीचे होता है, नाक की मदद से हम सांस लेते है और बाहर छोड़ते है, नाक के द्वार से ही ऑक्सीजन अंदर जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर आती है. जिससे हम जिन्दा रहते है। नाक गंद को सुंगने और उनकी पहचान करने में भी काम आता है, हम अपने आस पास की गंद को सुंग कर पहचान कर सकते है की गंद किसकी है और कहां से आ रही है। गंद सुंगने की कला हमे हमारे जीवन में बहुत फायदे करती है. हम पहचान कर सकते है की कौनसी चीज हमारे लिए सही है या नहीं। अगर हमारे सामने कोई खाना रख दिया जाए तो हम उसे सुंग कर बता सकते है के वो खाना ताजा है या सड़ा हुआ या वो खाने लायक है या नहीं, जैसे आप सभी अपने घर में सुंग कर जरूर चेक करते होंगे रात का बचा हुआ खाना सुबह ख़राब तो नहीं हुआ ?

नाक की सुंगने की रेंज कितनी है ? (NOSE RANGE)

एक इंसान का नाक 600 सेंटीमीटर की दुरी तक गंद को सुंग सकता है यानि की 20 फुट की दुरी के करीब। और अब आपको ये जानकर ख़ुशी होगी के इंसान का नाक 1 trilion odors (गंद) को सुंगने में सक्षम है, इसका मतलब है के हमारा नाक एक लाख करोड़ अलग अलग गंद को सुंग सकता है।

#3. कान क्या है ?

कान हमारा सुनने वाला सेंसेस है, जिसकी मदद से हम आस पास की आवाजों को सुन पाते है। कान के बिना जीवन जीना बड़ा मुश्किल है , आप कल्पना कर सकते है के कान के बिना आप कैसे अपनी जिंदिगी बिताएंगे, कान हमारे चेहरे के साइड में होते है। कान एक बेहतर जीवन जीने में हमारी मदद करते है, अगर आप किसी से बात करते है, तो सबसे पहले हमे दुसरो की बाते सुननी होगी तभी हम उनकी बातो का जवाब दे सकेंगे, अगर आप किसी ऐसे जगह पर फस गए है जो बेहद खतरनाक है जहां कोई इंसान नहीं है और  चारो ओर सिर्फ जंगल ही जंगल है, ऐसी जगह से बाहर नकलने के लिए कान हमारे बहुत जरुरी सेंसेस है, इनकी मदद से आप खतरे को भाप सकते है ओर दूर स्थान से भी आवाज सुनके आप पता कर सकते है के आपको कोई खतरा तो नहीं है। अगर आपको किसी खातरनाक जानवर की आवाज आती है तो आप जल्दी से जल्दी छुपने का और अपनी जान बचाने का तरीका निकालेंगे। 

कान की सुनने की रेंज कितनी होती है ? (EAR RANGE)

 एक इंसान की सुनने की रेंज 12 Hz (hertz) से 28 KHz होती है। (Minimum Sound Frequency - 12 Hz) और (Maximum Sound Frequency - 28 KHz). 

#4. टेस्ट रेंज (TASTE RANGE)

इंसान का टेस्ट रेंज होता है के हम मीठा, कड़वा, खट्टा, नमकीनी, मास का स्वाद (meaty), गर्म, ठंडा इत्यादि। टेस्ट करना भी हमे बाकि सेंसेस की तरह विरासत में मिला है जिसकी मदद से हम किसी भी चीज को टेस्ट करके उसकी पहचान कर सकते है के वो खाने लायक है या नहीं। हम अपनी जीब से स्वाद को जान पाते है अगर आप कोई खाना खाने वाले है तो आप उसे चखकर या खाकर पता कर सकते है के उस खाने का स्वाद क्या है ओर आप ये भी तय कर सकते है की वो चीज खाने लायक है नहीं, टेस्ट कर पाना ये हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं, टेस्ट करपाने की मदद से ही हम अपने मंदपसंद खाना खाकर आनंद ले पाते है। 

छूना(touch)

एक इंसान किसी भी चीज को छूकर पता कर सकता है के वो चीज कैसी है जैसे- की हम छूकर पता का सकते है के वो चीज ठंडी है या गर्म। छूने की रेंज होती है - ठंडा, गर्म, नाजुक, मजबूत, मुलायम, फॉमी, डस्टी, इत्यादि।छूने से हम किसी भी चीज की बनावट को पहचान सकते है। किसी चीज को छूकर समझ पाना हमारे जीवन में बहुत काम आता है इसकी मदद से हम पता कर सकते है के जिस चीज को हम छू रहे है उसका हम किस प्रकार से उपयोग कर सकते है। टच हमे जीवन में नुकसान होने से भी बचाता है जैसे की आप छू कर पता कर सकते है के पानी कितना गर्म है या कितना ठंडा है और वो आपकी सेहत के लिए पीने लायक है या नहीं।     

टच रेंज  (TOUCH RANGE)

इंसान की त्वचा(skin) 118 digree तक टेम्पेरेचर को झेल सकती है। और अगर टेम्प्रेचर 162 डिग्री से ऊपर चला जाता है तो इंसानी त्वचा जल जाएगी। छूने से हम ज्याद या कम टेम्प्रेचर का पता कर सकते है।

ऊपर बताए गए हमारे सरे सेंसेस जीवन को बेहतर बनाते है। इन अनमोल सेंसेस की वजह से ही हम अपने जीवन को अपने तरीके से एक खुशाल जिंदिगी जी पाते है, 

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